श्रमगान

श्रम की आवाज़ • गरिमा के गीत • सामाजिक एकता की लय

बहनों, श्रम और संगीत को समर्पित ‘सेवा’ की एक पहल

"जहाँ श्रम में लय है और हर बहन के हृदय में एक गीत बसता है।"

'सेवा' की बहनों के लिए संगीत जीवन से अलग नहीं है। यह उनके श्रम, जीवन, समाज, उत्सवों, संघर्षों, आशाओं और सपनों से गहराई से जुड़ा हुआ है। श्रमगान एक ऐसी पहल है, जो इन आवाज़ों को एक साथ लाती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाए जाने वाले लोकगीतों, श्रमगीतों और जीवनगीतों को संजोकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का प्रयास करती है।

श्रमगान क्या है?

श्रमगान 'सेवा' की एक ऐसी पहल है, जो बहनों, श्रम और संगीत को एक साथ जोड़ती है।

गाँव हो या शहर, हर समाज में बहनों ने वर्षों से अपने मन की भावनाओं, अनुभवों और विचारों को गीतों के माध्यम से व्यक्त किया है। चाहे वे खेतों में काम करती हों, कढ़ाई-बुनाई करती हों, नमक के खेतों में श्रम करती हों, बाज़ार में अपना व्यापार करती हों या घर के काम में लगी हों – संगीत हमेशा उनके जीवन का हिस्सा रहा है। गीत उनके ज्ञान, यादों, संघर्षों, आशाओं, सपनों और एकता की भावना को व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम हैं।

श्रमगान इस जीवंत परंपरा को पहचानता है और 'सेवा' की बहनों के लोकगीतों, श्रमगीतों और जीवनगीतों को एकत्रित कर उनका दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और संवर्धन करने का प्रयास करता है। साथ ही, यह बहनों की आवाज़, उनकी कहानियों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुँचाने के लिए एक सशक्त मंच भी प्रदान करता है।

श्रमगान के बारे में और जानें

संगीत, बहनें और सेवा

रोज़मर्रा के जीवन में संगीत

श्रम और संगीत एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। बहनें खेतों में काम करते समय, कढ़ाई-बुनाई करते समय, अपना व्यापार करते समय या परिवार की देखभाल करते समय अक्सर गीत गाती हैं। संगीत उनके रोज़मर्रा के श्रम में लय, आनंद और अपनापन भर देता है।

संगीत से जुड़ता है समाज

गीत गाँव, शहर, अलग-अलग आजीविकाओं और पीढ़ियों की बहनों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। इनमें एकता, सहयोग और मिलकर आगे बढ़ने का संदेश समाया हुआ है।

संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोता है

पारंपरिक गीतों में हमारे समाज की कहानियाँ, अनुभव, ज्ञान और सांस्कृतिक स्मृतियाँ जीवित रहती हैं। श्रमगान इस अमूल्य विरासत को संजोकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का प्रयास करता है।

विशेष गाने

इलाबेन के स्वर में एक गीत

श्रमगान के संग्रह में सबसे अमूल्य रिकॉर्डिंग्स में से एक गीत ‘सेवा’ की संस्थापक इलाबेन भट्ट ने अपनी आवाज़ में गाया है। उनकी आवाज़ में गरिमा, संगठित शक्ति, सादगी और सेवा जैसे मूल्यों की झलक मिलती है, जो आज भी ‘सेवा’ की यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं।

गीत का परिचय

"शांति का वाद्य बना तू मुझे" विश्वप्रसिद्ध प्रार्थना “मेक मी एन इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ योर पिस” का हिन्दी रूपांतरण है, जिसे सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी की प्रार्थना के नाम से भी जाना जाता है। शांति, करुणा, क्षमा और सेवा के इसके गहन संदेश से प्रेरित होकर सेवा (स्वाश्रयी महिला सेवा संघ) की संस्थापक इलाबेन भट्ट ने इस प्रार्थना का सरल हिन्दी में रूपांतरण किया, ताकि ‘सेवा’ की बहनें इसे सहजता से समझ सकें, गा सकें और अपने जीवन में आत्मसात कर सकें।

गीत के शब्द

शांति का वाद्य बना तू मुझे, प्रभु! शांति का वाद्य बना तू मुझे। शांति का वाद्य बना तू मुझे, प्रभु! शांति का वाद्य बना तू मुझे। हो तिरस्कार जहाँ, करूँ स्नेह, हो हमला तो क्षमा करूँ मैं।

अमे पार करीशु गीत

‘अमे पार करिशु’ जोश, उत्साह और निर्भयता से भरा गीत है, जिसे इलाबेन भट्ट ने ‘वी शैल ओवरकम’ से गुजराती में रूपांतरित किया था। 1977 से यह गीत ‘सेवा’ की बहनों के लिए संघर्ष, एकता और संगठित शक्ति का प्रेरणास्रोत बना हुआ है। इसका संदेश है, मिलकर हम हर मुश्किल को पार करेंगे।

गीत का परिचय

"अमे पार करीशु" साहस, उत्साह, आशा और निर्भयता से भरपूर एक प्रेरणादायक गीत है। यह विश्वप्रसिद्ध अंग्रेज़ी गीत "वी शेल ओवरकम " का गुजराती रूपांतरण है। यह गीत मूल रूप से अमेरिकी श्रमिक आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में दक्षिण कैरोलिना की एक तंबाकू मजदूर महिला ने श्रमिक हड़ताल के दौरान अपनी साथी लुईस सिमन्स के साथ इसे गाया, जिसके बाद यह व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ। बाद में प्रसिद्ध लोकगायक पीट सीगर ने भी इस गीत को अपनाया और अपने स्वर से इसे पूरी दुनिया तक पहुँचाया।

गीत का परिचय

"अमे पार करीशु" साहस, उत्साह, आशा और निर्भयता से भरपूर एक प्रेरणादायक गीत है। यह विश्वप्रसिद्ध अंग्रेज़ी गीत "वी शेल ओवरकम " का गुजराती रूपांतरण है। यह गीत मूल रूप से अमेरिकी श्रमिक आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में दक्षिण कैरोलिना की एक तंबाकू मजदूर महिला ने श्रमिक हड़ताल के दौरान अपनी साथी लुईस सिमन्स के साथ इसे गाया, जिसके बाद यह व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ। बाद में प्रसिद्ध लोकगायक पीट सीगर ने भी इस गीत को अपनाया और अपने स्वर से इसे पूरी दुनिया तक पहुँचाया।

गीत के शब्द

अमे पार करिशु (३)... एक दिन... ओ... ऊंडा अंतरमा अमने छे विश्वास... अमे पार करिशु... एक दिन...

संगीत, आजीविका और सशक्तिकरण

हमारी परंपरा का संरक्षण

गीतों का दस्तावेज़ीकरण और संग्रह करके हमारी संगीत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखने का प्रयास।

हमारी पहचान को सशक्त बनाना

बहनों की आवाज़, उनके जीवन की कहानियों, अनुभवों और संघर्षों को सामने लाकर उनकी पहचान और आत्मगौरव को मजबूत बनाने का प्रयास।

नए अवसरों का निर्माण

उभरते हुए गायकों, लोककला कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करके आजीविका, नेतृत्व और नए अवसरों के निर्माण में सहयोग देना।

सुनना जारी रखें

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सेवा के बारे में

सेवा स्व-रोज़गार करने वाली महिला श्रमिकों का एक संगठन है, जो पूर्ण रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य करता है। आज सेवा का आंदोलन भारत भर में और देश की सीमाओं से परे भी लाखों महिलाओं को जोड़ता है।

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